नई दिल्ली: लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर वोटिंग से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी सांसदों से महत्वपूर्ण अपील की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस मुद्दे पर लंबी चर्चा हो चुकी है और कई स्तरों पर उठाए गए सभी भ्रम अब दूर किए जा चुके हैं। ऐसे में अब समय है कि सभी सांसद मिलकर महिला आरक्षण के पक्ष में मतदान करें।
संसद में चल रही बहस का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इस विषय पर कल देर रात तक करीब एक बजे तक चर्चा हुई, जिसमें हर आशंका और सवाल का विस्तार से समाधान किया गया।
‘सारे भ्रम दूर हो चुके हैं, अब राजनीति नहीं’
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा कि महिला आरक्षण को लेकर जो भी भ्रम फैलाए गए थे, उन्हें तथ्यों के आधार पर दूर किया गया है। उन्होंने कहा कि जिन जानकारियों की कमी थी, उन्हें भी सभी सदस्यों तक पहुंचाया गया है और हर आपत्ति का समाधान किया जा चुका है।
पीएम मोदी ने कहा कि इस मुद्दे पर बीते चार दशकों से लगातार राजनीति होती रही है, लेकिन अब समय आ गया है कि देश की आधी आबादी को उसका अधिकार पूरी गंभीरता के साथ दिया जाए।
‘महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाना समय की मांग’
प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं का प्रतिनिधित्व सीमित होना उचित नहीं है। उन्होंने सांसदों से अपील करते हुए कहा कि मतदान से पहले पूरी संवेदनशीलता के साथ विचार करें और महिला आरक्षण के पक्ष में समर्थन दें।
उन्होंने कहा कि देश की करोड़ों महिलाओं की नजर संसद पर है और सभी को उनकी भावनाओं और अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।
‘इतिहास रचने का अवसर, महिलाओं को दें उनका हक’
पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा कि यह केवल एक विधेयक नहीं, बल्कि देश की नारी शक्ति को सशक्त बनाने का ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे किसी भी तरह ऐसा निर्णय न लें जिससे महिलाओं की भावनाएं आहत हों।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि यह संशोधन सर्वसम्मति से पारित होता है तो इससे न केवल महिलाओं की शक्ति बढ़ेगी, बल्कि भारतीय लोकतंत्र भी और मजबूत होगा।
शाम 4 बजे होगी अहम वोटिंग
जानकारी के मुताबिक, आज शाम 4 बजे लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विधेयकों पर मतदान होगा। हालांकि सरकार पहले ही महिला आरक्षण कानून को लागू करने की अधिसूचना जारी कर चुकी है, जिस पर विपक्ष ने आपत्ति जताई है।
विपक्ष का कहना है कि अधिसूचना जारी करने से पहले संसदीय प्रक्रिया के तहत वोटिंग पूरी होनी चाहिए थी। इस मुद्दे पर संसद में सियासी माहौल गरमाया हुआ है।
